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कश्मीरी पंडितों के हत्यारे बिट्टा कराटे की बीवी है प्रशासनिक अधिकारी, बीवी को है हत्यारे शौहर की करतूत पर फक्र


क्या आप जानते हैं कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट' (जेकेएलएफ) का सदस्य फारुख अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे ने एक राज्य प्रशासनिक अधिकारी से शादी की है? ठीक सुना आपने। कई कश्मीरी पंडितों की हत्या का जिम्मेदार बिट्टा कराटे ने कश्मीर प्रशासनिक सेवा की अधिकारी 'असाबा अर्ज़ुमंद खान' से शादी की है, जो जम्मू कश्मीर सरकार में प्रशासनिक अधिकारी हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाली अर्जुमंद ने वर्ष 2011 में जम्मू कश्मीर पीसीएस की परीक्षा पास की।


मालूम हो कि पाक एजेंसी आईएसआई की शह पर कश्मीरी पंडितों की हत्या करने वाला फारुख 1990 में गिरफ्तार हुआ। 16 साल जेल में रहने के बाद 2006 में सबूतों के अभाव में 'टाडा कोर्ट' से बरी हो गया। पुनः 2008 में अमरनाथ जमीन विवाद के समय गिरफ्तार किया गया, लेकिन 8 महीनों में ही उसे न्यायालय से उसे जमानत मिल गई। तीसरी बार वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने 'टेरर फंडिंग' के आरोप में उसे गिरफ्तार किया और 19 मार्च को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट की प्रवीण सिंह की अदालत ने यासीन मलिक, फारुख अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे एवं ज़हूर अहमद शाह वटाली सहित अन्य आतंकियों पर एनआईए को आरोप तय करने का आदेश दिया।


आतंकवादी से शादी की खातिर परिवार से लड़ गयीं अर्जुमंद, कहती हैं- उससे शादी करना सम्मान की बात

यह जानकर किसी को भी आश्चर्य होगा कि भला कोई भी इंसान किसी आतंकवादी से शादी कैसे कर सकता है? लेकिन 'असाबा खान' ने बिट्टा से शादी के लिए घरवालों को जबरन मनाया, उनसे लड़ गयीं। यही नहीं जिन सगे संबंधियों, दोस्तों ने आदि इस फैसले पर एतराज़ जताया, उससे भी उन्होंने रिश्ते तोड़ दिए। जर्मनी से शांति तथा संघर्ष (Peace and Conflict Studies) में डिग्री लेने वाली सरकारी मैडम को आतंकवादी से शादी करना सम्मान का प्रतीक लगता है।

किसी भी आम इंसान को यह अजीब ही लगेगा कि एक सरकारी अधिकारी, जिसे बिट्टा कराटे जैसे आतंकियों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए, उसने उसी से शादी कर ली। ऐसा करना ना सिर्फ खूंखार बिट्टा कराटे का हौसला बढ़ाता है, बल्कि अब वह भी सरकारी पैसों से ऐश करता है। असाबा कहती हैं कि जब वह 2009 में फारुख से मिलीं तो वह पीसीएस नहीं थीं। 2011 में प्रशासनिक अधिकारी बनने के बाद उन्होंने बिट्टा से शादी की। उनका कहना है कि 'फारुख से शादी करना सम्मान की बात है। इसमें कुछ ग़लत नहीं है। लोगों को जब पता चला कि मैंने एक ऐसे व्यक्ति से शादी की है, जो देश का दुश्मन है तो उन्हें अजीब लगता है लेकिन मुझे इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। यह मेरा निजी फैसला है।'

शादी से पहले बिट्टा कराटे ने कहा था, "आज़ादी मेरा पहला और आखिरी सपना है। असाबा से मेरा शादी होना मेरे आंदोलन को कम नहीं करेगा, बल्कि असाबा भी मेरे आंदोलन का समर्थन करती हैं। मेरे एक दोस्त नईम ख़ान की पत्नी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर हैं और जावेद मीर की पत्नी एक सरकारी वकील।" ये सारी चीजें पब्लिक डोमेन में हैं, लेकिन हमारी सरकारें सारी शक्तियां होने के बावजूद निहत्था प्रतीत होती हैं। आख़िर आतंकियों से शादी करने वालों को सरकारी सेवाओं में क्या रखा गया है अभी तक? क्या ऐसा करने से रोकने के लिए नियम नहीं होने चाहिए? दरअसल, गलती हमारी है। हम कभी भी इन मसलों पर सरकार से सवाल करते ही नहीं। सिर्फ नेताओं की बातों में आकर उनके कहे अनुसार चलते हैं। हम आतंकियों को सिर्फ़ पालते ही नहीं हैं, उन्हें फूल प्रूफ सिक्योरिटी के साथ सार्वजनिक मंच भी देते हैं। जिनके खोपड़ी में गोली देनी चाहिए, उसे अपनी बात रखने के लिए माइक दिया जाता है।

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